भारतीय महिला ने रेस्त्रां से बनाई पहचान

यूं तो कई भारतीयों ने विदोशों में जाकर पैसे और शोहरत कमाई और वहीं बस गए, लेकिन कुछ लोग इनमें ऐसे भी मिलेंगे जिन्होंने पैसों से ज्यादा तवज्जो अपने समुदाय के लिये काम करने में दी, इसका एक उदाहरण हमें पूजा आहूजा में दिखता है जो आज से सत्रह साल पहले भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई से चच्यांग प्रांत के सबसे प्रसिद्ध शहर हांगचो में आकर बसीं।

पूजा हांगचो में जब आईं थीं तो उस समय यहां पर सिर्फ़ चौंतीस परिवार रहते थे, उनके खाने की समस्या के कारण पूजा आहूजा ने उन्हें अपने घर बुलाकर खाना खिलाना शुरु किया और घर में शुरु हुई इस छोटी सी शुरुआत ने आज एक रेस्त्रां का रूप ले लिया, हांगचो में भारतीय रेस्त्रां अच्छी खासी तादाद में हैं, लेकिन पूजा आहूजा के “जश्न” रेस्त्रां ने जो पहचान बनाई है उसके पीछे उनकी मेहनत और लगन साफ़ तौर पर दिखाई देती है, इस रेस्त्रां में खाना खाने वाले देसी और चीनी, दोनों तरह के लोग आते हैं। जश्न रेस्त्रां में जितने लोग खाना खाने आते हैं वो इसके पक्के ग्राहक बन जाते हैं, इसका राज़ खाने के स्वाद में छिपा है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। रेस्त्रां के लोकप्रिय होने के पीछे एक वजह ये भी है कि ये श्याओसिंग के उस इलाके में बना है जो व्यावसायिक क्षेत्र है, यहां पर अगर सिर्फ़ भारतीयों की बात करें तो हांगचो में रहने वाले अधिकतर भारतीय इस इलाके में आकर काम करते हैं।

रेस्त्रां के ऊपर वाली मंज़िल पर शादी ब्याह, जन्मदिन, मैरिज एनिवर्सरी और दूसरे तरह के आयोजनों के लिये बड़ा खूबसूरत बैंक्वेट हॉल भी बना हुआ है जिसे अक्सर भारतीय समुदाय के लोग बुक कराते हैं। इस समय हांगचो में करीब तीन हज़ार भारतीय रहते हैं, यहां पर रहने वाला शायद ही कोई भारतीय हो जो पूजा आहूजा के नाम से परिचित न हो, इसके पीछे एक बड़ा कारण ये भी है कि चाहे व्यापार हो सामाजिक कार्य, या फिर किसी भारतीय की मदद करना पूजा कभी पीछे नहीं रहतीं, हर त्योहार पर जश्न रेस्त्रां में आपको करीब तीन से साढ़े तीन सौ भारतीय  जश्न मनाते दिखेंगे। दिवाली पर पटाखे जलाने हों या फिर होली से पहले होलिका दहन सबकुछ जश्न रेस्त्रां के दरवाज़े पर होता है।

भारतीय पर्यटक जब भी हांगचो आते हैं और उन्हें भारतीय व्यंजनों की तलब लगती है तो वो जश्न रेस्त्रां में एक बार ज़रूर आते हैं।

आज चीन के मध्य और दक्षिणी हिस्से में आपको भारतीय रसोईं से जुड़ा कोई भी सामान बाज़ार में आसानी से मिल जाएगा, जिसके इस्तेमाल से आप घर में ही भारतीय व्यंजन बना सकते हैं, लेकिन एक ऐसा भी समय था जब चीन में भारतीय मसाले नहीं मिलते थे, उस दौरान यहां पर रहने वाले भारतीयों को स्थानीय मसालों से ही काम चलाना पड़ता था जिसके चलते उन्हें खाने पीने में बहुत परेशानी होती थी। इसी परेशानी के चलते हांगचो से थोड़ी दूर श्याओसिंग में अपना रेस्त्रां चलाने वाली पूजा आहूजा ने आसपास के भारतीय समुदाय की इस परेशानी को दूर करने की पहल की और भारतीय मसालों की पहली खेप हांग कांग से मंगवाई। हालांकि वो अपने रेस्त्रां के लिये भारतीय सामान हांगकांग से मंगवाती रहती हैं लेकिन इस बार उन्होंने अपने आस पास रहने वाले भारतीयों की परेशानी के चलते मसालों का काम शुरु किया।

इन मसालों का इस्तेमाल सिर्फ़ भारतीय समुदाय के लोग ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय उप महाद्वीप के लोग भी करते हैं, फिर चाहे वो हल्दी, सरसों, राई, सूखी लाल मिर्च, लौंग, गरम मसाले, तेज़ पत्ता, दालचीनी, इलाईची, जावित्री, हो या फिर कोई ब्रांडेड मसाला जिसमें चिकन मसाला, सांबर मसाला, मीट मसाला, शाही पनीर मसाला हो या फिर कोई और मसाले ये सभी बाज़ार में आज आसानी से मिलते हैं तो इसके पीछे पूजा आहूजा की कड़ी मेहनत और लगन का हाथ है।

शुरुआत में पूजा ने भारतीयों को घर घर जाकर मसाले पहुंचाए, धीरे धीरे उनका ये काम भी चल निकला और आज हांगचो से लेकर यीवू तक भारतीय लोग इन्हें मसाले वाली महिला के नाम से भी जानते हैं।

 

लेखक -पंकज श्रीवास्तव ।

http://hindi.cri.cn/chinainmyeyes/articles/634/20170913/26573_1.html

http://hindi.cri.cn/chinainmyeyes/articles/634/20170913/26577.html

www.IndiansInChina.com


Comments (2)

  • Deepthi

    Hi There. Where in Hangzhou is this restaurant ?

    I’ll be travelling to China from Singapore for a month and would absolutely love love to get details.

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